हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तिग़फ़ार केवल ज़बान से माफ़ी माँगने के लिए कहे जाने वाले शब्द नहीं हैं, बल्कि यह इंसान की आत्मा के लिए एक आध्यात्मिक सुगंध है। आयतुल्लाह बहाउद्दीनी इस्तिग़फ़ार को दुनिया और आख़िरत की भलाई प्राप्त करने वाले महत्वपूर्ण ज़िक्रों में से एक मानते थे।
आयतुल्लाह बहाउद्दीनी (क़) की नसीहत:
इस्तिग़फ़ार सबसे महत्वपूर्ण ज़िक्रों में से एक है। यह ऐसा ज़िक्र है, जो दुनिया और आख़ेरत की भलाई को अपने अंदर समेटे हुए है। इमाम रज़ा (अ) ने अपने पूर्वजों के माध्यम से हज़रत अली (अ) से रिवायत की है कि अमीरुल मोमिनीन ने फ़रमाया:
इस्तिग़फ़ार से स्वयं को सुगंधित करो! कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे गुनाहों की बदबू तुम्हें शर्मिंदा कर दे।
स्रोत: ज़िक्रहाए शिग़फ़्त-ए-आरिफ़ान, भाग 1, पेज 37
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